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मच्छर पुराण

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Hindi kahaniya

आर्ष अग्रवाल ”द्रष्टा”

यूँ तो दुनिया में अनेक प्रकार के जीव-जन्तु, पशु-पक्षी एवं कीङे-मकोङे पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए शेर, खरगोश, बाज, चिङिया, चीटीं, मकङी एवं  मच्छर। उपर्युक्त में से एक प्राणी अधिकांशत: हर जगह पाया जाता है और वो है मच्छर। मच्छर लगभग सभी जगह हैं इसलिए इन्हें विश्वविजेता कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी। ये प्राणी मुझे व्यक्तिगत रुप से बहुत प्रिय है। इसके पास एक अप्रतिम सौंदर्य है जो बाग-बगीचों के फूलों में नहीं है, एक चित्तहरण संगीत है जो किसी भी वाद्ययंत्रों में से नहीं आ सकती। इनका स्वभाव बहुत ही चंचल और तेजस्वी है। इनके व्यक्तित्व में अपार सौंदर्य एवं मनमोहक आभा है।

इनके इस बालस्वरुप, लङक्कपन से भरी क्रीङाओं, कलाबाजियों और खासकर इनके वायलिन जैसे संगीत को सुनकर कोई भी इनका दीवाना हो जाए। कान के पास आकर जो ये वायलिन बजाते हैं अहाआहाहाह… क्या मधुर ध्वनि होती है। जादू होता है जनाब एक बार सुन लीजिए बस, पर हमलोग तो तुरंत मारने पे उतारू हो जाते हैं। (कला को इज्जत देनी चाहिए)

आप किसी से भी पूछिए कि घर में कितने सदस्य हैं तो जवाब मिलता है पाँच, सात वगैरह वगैरह। परन्तु ये आँकङे सही नहीं हैं, सदस्यों की संख्या इकाई में तो हो ही नहीं सकती सैकङों में आती है और हर दिन बदलती रहती है। गिनती करते समय हम अपने अभिन्न अंग हर सुख-दुख में काटने वाला, किसी भी बात का बुरा ना मानने वाला, निष्पक्ष भाव से घर में रहने वाला.. सिकन्दर मच्छर को हमलोग भूल जाते हैं।

Mosquitos

बहुत हो गयी साले मच्छर की बङाई अब इन हरामखोरों के कारनामों का उल्लेख किया जाए।

हर प्राणियों का अपना अपना काम निर्धारित है। जैसे मकङी का जाला बुनना, मधुमक्खी का शहद बनाना.. इत्यादि इत्यादि पर साला ये मच्छर किस लिए है.. खून चूसने के लिए तो नहीं है शायद। मच्छर को किसलिए बनाया गया है इसका उल्लेख किसी भी शास्त्र या पुराण में नहीं है।

इससे मन में संदेह उत्तपन्न होता कि क्या प्राचीन समय में मच्छर नहीं थे? बहुत सारे मुनि, साधु जंगल में इतनी गहरी तपस्या करते थे कि भंग करने के लिए स्वर्ग से अप्सराएँ आती थी ये काम तो साला एक दो टके का मच्छर भी कर सकता था। आज तो चैन से संङास भी नहीं कर सकते। उपर्युक्त चर्चा से स्पष्ट होता है कि मच्छर किसी भी पौराणिक कथा का किरदार नहीं है और ना ही किसी भगवान का सवारी है(बङे आश्चर्य की बात कि किसी ने भी ऐसे प्रेरणादायक जीव को अपनी सवारी नहीं बनाया, लगता है इसी लिए बौखलाए हैं साले)। मतलब ये सब साले कुछ ही साल पुराने हैं.. लग रहा है अंग्रेजो के बाद बने है। जरुर ये किसी मकसद के लिए बनाए गए है। कौन है साले ये..

कहीं ये कोई अंङरकवर एजेंट तो नहीं.. या फिर ये किसी राजनीतिक पार्टी से सम्बन्धित हो सकते हैं.. कि जो विरोधी दल का है सिर्फ उसके घर इनकी छाया पङती है। ऊपर लगाए गए तमाम कयासों में से कोई सा भी संभव मालूम नहीं पङता बहुत सोच-विचार के बाद संभावना नजर आती है कि ये साले ब्लङ बैंक के एजेंट हो सकते हैं। हर मोहल्ले के ब्लङ बैंक में कमीशन सेट है इनका। लोगों का खून चूस कर बैंक में बेच आते हैं बदले में हमें क्या मिलता है खुजली, गोल लाल दाना।

सारे मनुष्य जाति को इसके खिलाफ एकजुट होना पङेगा, एक आंदोलन, एक मुहिम छेङना होगा पूरे देश में, सरकार को इसके लिए कानून बनाना चाहिए कि जब मच्छर खून बेचकर आता है तो कमाई का कुछ हिस्सा पीङित को भी मिलना चाहिए।

वैसे अगर ध्यान से देखा जाए तो आजकल के मच्छर कुछ ज्यादा जानदार और ताकतवर हो गए हैं, नए पीढी के है जिम वगैरह जाते होगें साले सब। बाजार में एक Mosquito  रैकट आता है उससे करंट लग के गिरने के दो मिनट बाद दुबारा साले सब हरामजादे जिंदा हो जाते हैं इनके पास भी लग रहा है कि अमृत कलश है विभीषण की कमी है वही है जो बता सकता है।

इन सालों के अन्दर संस्कार नाम कोई भी चीज नहीं है। इस सम्बन्ध में मैंने इनके माँ-बाप से बात करनी चाही पर उन चूतियों में भी संस्कार नहीं था, अत कोई भी बात करने को राजी ना हुआ। मैंने सालों को वहीं मार गिराया।

रहन सहन-

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हर मोहल्ले मच्छरों की एक छावनी, एक आफिस होती है। जहाँ पर इनको ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। आफिस कहीं भी हो सकती है छत पर, बरामदे में या फिर संङास में। इन सारी व्यवस्थाओं का खर्चा खून बेचने से मिले कमीशन से चलता है। ट्रेनिंग में इनको सिखाया जाता है कि कैसे, कब काटना चाहिए, जो व्यक्ति किसी जरूरी कृत्य में संलग्न हो उसको सबसे पहले काटना रहता है। इनकी एक पाठ्य पुस्तक है- “Best Places To Bite”  इसके लेखक हैं सर जार्ज मच्छमास, बेस्टसेलर बुक है। यहीं पर ये जिम ज्वाइन करते हैं, जिम में ये अपने पंखों, टाँगों, हाथों और विशेषकर के अपनी सुई जैसी घटिया सूँङ को धार देते हैं मजबूत करते हैं। इसके बाद इनकी छोटी-छोटी सेना बनायी जाती है और बताया जाता है कि कब, कहाँ, किसके घर पर हमला करना है, हरएक मच्छर के पास एक वायरलेस माइक होता है जिससे वो अपने बास से कनेक्टेङ रहता है। सेना के कूच करने से पहले एक चींटी की बलि दी जाती है। फिर ये निकलते हैं और अपने गंदे नंगे पैर से हमारे ऊपर बैठते हैं, त्वचा को मुलायम बनाने के लिए थोङा थूकते हैं, अब आहिस्ते से अपनी नुकीली, चमचमाती सूँङ धसाते हैं…..सिप-सिप-सिप।

अब जब हम जवाबी कारवाई के लिए इनको रैकेट से मारना चालू करते हैं कुछ तो तुरंत शहीद हो जाते हैं, कुछ बेहोश हो जाते हैं और एक-दो मिनट होश आ जाता है। जैसे ही इनकी संख्या कम होने लगती है कोई एक मच्छर वायरलेस पर खबर भेजता होगा-“हमलोग मारे जा रहें हैं आज साले सब दो-दो रैकेट से मार रहे हैं या तो और योद्धा भेजिए या हमलोग वापिस आ रहे हैं। ओवर !!”। मच्छरों को मारने का एक बहुत पुराना औजार है “Mortein” पहले इससे मच्छर भागते थे मरते नहीं थे, मरते ये कभी भी नहीं है। अब तो ये भागते भी नहीं हैं साले, हरामजादे अब मास्क पहनकर आते हैं। एक है- “All Out”। All Out वाले विज्ञापन में जो मच्छर कुछ बोलता हुआ मरता है वो साला भी चूतिया बनाता है। साजिश है सालों की बहुत बङी, सब मिल के चूतिया बनाते हैं। आल-आऊट की सुंगध इतनी अच्छी है उससे भला कौन मरेगा। उस समय सारे मच्छर कमरे की सीलिंग पर या पंखे के ब्लेङ पर आराम करते हैं दरअसल मच्छरों की वहाँ भी सेटिंग है, कमीशन फिट है। जितना भी आल-आऊट बिकेगा उसका .23653% इनको मिलता है। इन पैसों से ये अपने आप को और एङवांस् करते हैं(ङिजिटल इंङिया के अन्तर्गत), नए-नए उपकरण लाते हैं। कुछ विशेष सूत्रों से पता चला है कि आने वाले दिनों में ये करंट प्रुफ जैकेट पहनकर आने वाले हैं।

The end of mosquitos hindi kahaniya

सच तो यह है कि मच्छर को ना तो भगाया जा सकता है, ना ही मारा सकता है क्योंकि वो अजर-अमर है वो है वो रहेगा, कभी मिटेगा नहीं। हमलोग को उनके सामने आत्मसमर्पण करना ही होगा, तभी वो मनुष्य जाति को माफ करेंगे। इसके लिए या तो मच्छर से कटवा लें जबतक वो खुद खून पीकर ना उङ जाए उसको खून चूसने दें, इस बीच कोई भी धृष्टता ना करें। या एक और उपाय है कि ब्लङ बैंक से सभी ब्लङ ग्रुप का खून ले आएँ, और कमरे के बीच में कटोरी में ला कर रख दें, हर ब्लङ ग्रुप का लेबल चिपका दें।(खून में जहर मिलाने की जुर्रत ना करें खामियाजा भुगतना पङ सकता है)। कभी किन्हीं विशेष मौंको पर बादाम या काजू को घिसकर खून में मिला दिया करें। तीन महीने में एक बार मच्छरों के लिए यज्ञ कराएँ, ब्राह्मण की जगह 1953 मच्छरों को आंमत्रित करें, उनको सम्मानित करें ऊँचे स्थान पर बैठाएँ और स्वयं उनके कमलरूपी चरणों के पास बैठें। दक्षिणा के जगह हर मच्छर को प्लास्टिक के पाउच में हर ब्लङ ग्रुप का खून दे दें, और फिर पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें। उपर्युक्त उपाय करने से संभावना है कि मच्छर जैसे शक्तिशाली प्राणी में दया का आर्विभाव हो और वो हमें माफ कर सकें।

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